दीपवाली क्यों मनाई जाती है – दीपावली क्यों मनाते हैं – दीपावली कब, क्यों, कैसे और कहाँ मनाई जाती है

Deepawali 2017 Deewali 2017 Deepavali 2017 दीपावली २०१७ की अग्रिम बधाईयों के साथ आप को हम दीपवाली के बारे में बताने जा रहे हैं | भारत वर्ष का ये एक महत्वपूर्ण पर्व है जो आपको अँधेरे से उजाले की ओर ले जाता है – आज आपको इस पोस्ट के माध्यम से हम बताएँगे कि दीपवाली क्यों मनाई जाती है – दीपावली क्यों मनाते हैं – दीपावली कब, क्यों, कैसे और कहाँ मनाई जाती है दीपावली 2017 के बारे में हिंदी में पूरी जानकारी – deepawali kyu manate hai, deepawali kyu manaya jata hai, Deepawali 2017 , Deewali 2017 , Deepavali 2017 , deepawali kyo manai jati hai

दीपवाली क्यों मनाई जाती है – दीपावली क्यों मनाते हैं – दीपावली कब, क्यों, कैसे और कहाँ मनाई जाती है

दीपावली कब मनाई जाती है –

दीपावली त्यौहार कार्तिक अमावस्या के दिन मनाया जाता है। लेकिन यह त्यौहार 5 दिनों(धनतेरस,नरक चतुदर्शीअमावश्याकार्तिक शुक्ल प्रतिपदाभाई दूजका होता है इसलिए यह धनतेरस से शुरूहोकर भाई दूज पर खत्म होता है। दीपावली त्यौहार की तारीख हिन्दू कलेंडर के अनुसार निर्धारित होतीहै लेकिन यह त्योहार अक्तूबर – नवंबर महीने मे आता है।

दीपावली क्यों मनाई जाती है –

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हिन्दू धर्म में –


पहली कथा –

हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और पत्नी सीता को उसके बंधन से छुड़ाने के बाद भगवान राम, माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य, अयोध्या, बहुत लम्बे समय(14 वर्ष) के बाद वापस आये थे। अयोध्या के लोग अपने सबसे प्रिय और दयालु राजा राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के आने से बहुत खुश थे। इसलिये उन्होनें भगवान राम का लौटने का दिन अपने घर और पूरे राज्य को सजाकर, मिट्टी से बने दिये और पटाखे जलाकर मनाया। हिन्दू महाकाव्य रामायण के अनुसार, भगवान राम राक्षस राजा रावण को मारकर और पत्नी सीता को उसके बंधन से छुड़ाने के बाद भगवान राम, माता सीता व भाई लक्ष्मण के साथ अपने राज्य, अयोध्या, बहुत लम्बे समय(14 वर्ष) के बाद वापस आये थे। अयोध्या के लोग अपने सबसे प्रिय और दयालु राजा राम, उनकी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के आने से बहुत खुश थे। इसलिये उन्होनें भगवान राम का लौटने का दिन अपने घर और पूरे राज्य को सजाकर, मिट्टी से बने दिये और पटाखे जलाकर मनाया।

हिन्दी ग्रंथ रामायण के अनुसारदशरथ पुत्र भगवान श्री राम ने अपने वनवास काल मे लंका राजारावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। और जब वे चौदह वर्षों का वनवास पूर्ण कर अपनेनगर अयोध्या पहुंचे तो अयोध्यावासियों ने पूरे नगर मे घी के दिये जलाकर उत्सव मनाया था। तभी सेहर कार्तिक अमावस्या को दीपावली मनाई जाती है।

दूसरी कथा –

देवी लक्ष्मी धन और समृद्धि की स्वामिनी मानी जाती हैं। यह माना जाता है कि राक्षस और देवताओं द्वारा समुद्र मंथन के समय देवी लक्ष्मी दूध के समुद्र (क्षीर सागर) से कार्तिक महीने की अमावस्या को ब्रह्माण्ड में आयी थी। यही कारण है कि यह दिन माता लक्ष्मी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में दीपावली के त्यौहार के रूप में मनाना शुरू कर दिया गया।

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक महान दानव राजा बाली था, जो सभी तीनों लोक (पृथ्वी, आकाश और पाताल) का मालिक बनना चाहता था, उसे भगवान से असीमित शक्तियों का वरदान प्राप्त था। पूरे विश्व में केवल गरीबी थी क्योंकि पृथ्वी का सम्पूर्ण धन राजा बाली द्वारा रोका हुआ था। भगवान के बनाए ब्रह्मांण्ड के नियम जारी रखने के लिए भगवान विष्णु ने सभी तीनों लोकों को बचाया था (अपने वामन यानि 5वें अवतार में) और देवी लक्ष्मी को उसकी जेल से छुडाया था। तब से, यह दिन बुराई की सत्ता पर भगवान की जीत और धन की देवी को बचाने के रूप में मनाया जाना शुरू किया गया।

तीसरी कथा –

मुख्य दीपावली यानि दिवाली पर्व के तीसरे दिन से एक दिन पहले का दिन नरक चतुर्दशी के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है कि बहुत समय पहले, नरकासुर नाम का राक्षस राजा(प्रदोषपुरम में राज्य करता था)था, जो लोगों पर अत्याचार करता था और उसने अपनी जेल में 16000 औरतों को बंधी बना रखा था। भगवान कृष्ण (भगवान विष्णु के 8वें अवतार) उसकी हत्या करके नरकासुर की हिरासत से उन सभी महिलाओं की जान बचाई थी। उस दिन से यह बुराई सत्ता पर सत्य की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

चौथी कथा : 

हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, निष्कासन के लम्बे समय(12 वर्ष) के बाद कार्तिक महीने की अमावस्या को पांडव अपने ऱाज्य लौटे थे। कोरवों से जुएं में हारने के बाद उन्हें 12 वर्ष के लिये निष्कासित कर दिया गया था। पांडवों के राज्य के लोग पांडवों के राज्य में आने के लिए बहुत खुश थे और मिट्टी के दीपक जलाकर और पटाखे जलाकर पांडवों के लौटने दिन मनाना शुरू कर दिया।

जैन धर्म मे –

 तीर्थंकर महावीर, जिन्होंने आधुनिक जैन धर्म की स्थापना की, उन्हें इस विशेष दिन दिवाली पर निर्वाण की प्राप्ति हुई जिसके उपलक्ष्य में जैनियों में यह दिन दीवाली के रूप में मनाया जाता है माना जाता है कि कार्तिक कृष्ण अमावस को भगवान महावीर का निर्वाण हुआ थाइसलिए वीर निर्वाण दिवस जैनधर्मानुसार दीपावली पर्व के रूप मे मनाया जाता है।

 

सिख धर्म मे –

वर्ष 1577 मे अमृतसर के स्वर्ण मंदिर की स्थापना भी दीपावली पर ही की गयी। और वर्ष 1619 मेसिक्खों के छठे गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को जेल से रिहा दीपावली के दिन ही किया।

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दीपावली का त्यौहार कैसे मनाया जाता है :

दीपावली का पूरा त्यौहार 5 दिनों तक मनाया जाता है। यह धनतेरस से शुरू होकर भाई दूज पर खत्म होताहै । लेकिन दीपावली की तैयारी कई दिनों पहले से शुरू हो जाती है। लोग अपने घरोंदुकानों आदि कीसफाई करते है। घरो और अपनी दुकानों आदि की रंगाईपुताई करते है। बाज़ारों की गलियों को सुनहरीझंडियों आदि से सजाया जाता है। इस तरह दीपावली से पहले ही घरमोहल्लेबाजार आदि सब साफसजे हुए दिखाई देते है। दीपावली 5 दिन का त्यौहार है जिसके बारे मे हम आपको नीचे विस्तृत स्वरुप में  बता रहे है

1. पहला दिन (धनतेरसधनतृयोदशी) –

धनतेरस का बिग्रह का अर्थ है धन+तेरस = धन का अर्थ संपति और तेरस का अर्थ 13वां दिन। अर्थात चन्द्र मासके 2 छमाही के 16वें दिन घर के लिए धन आना। इस शुभ दिन पर लोग सोनाचाँदीबर्तन आदिखरीदकर घर पर लाते है। यह दिन भगवान धनवंतरी की जयंती के उपलक्ष्य मे मनाया जाता है,जिनकी उत्पति समुद्र मंथन के दौरान हुई।

2. दूसरा दिन (नरक चतुर्दशी) –

नरक चतुर्दशी 14वें दिन आती है। जब भगवान कृष्ण ने नरकासूर का वध कर बुराई की सत्य की जीतपर जश्न मनाया जाता है। इस दिन लोग सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके नए कपड़े पहनते है औरअपने घरो मे और आसपास दीपक जलाते है और भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते है और पूजा करने केबाद पटाखे जलाते है।

3. तीसरा दिन (अमावस) –

ये दीवाली का सबसे मुख्य दिन है इसलिए इसे बड़ी दीवाली  भी कहते हैं इस मुख्य दिन पर लोग नए कपड़े पहनकर माता लक्ष्मी जीसरस्वती जी और गणेशजी की पूजा कीजाती है। लोग देवी देवता की आराधना कर माता लक्ष्मी से सदा घर मे रहने का निवेदन करते है। इस महान पूजा के बाद घरों और सड़कों पर दीपक और पटाखे जलाए जाते है। इस त्यौहार का महत्वपूर्णदिन भी यही है।

4. चौथा दिन (गोवर्धन पूजा/शुक्ल प्रतिपदा) –

भगवान कृष्ण द्वारा इन्द्र के गर्व को पराजित करके लगातार बारिश और बाढ़ से बहुत से लोगो औरमवेशियों के जीवन की रक्षा करने के लिए भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अँगुली पर उठा लिया था।इसलिए इस दिन लोग अपने गायबैलों को सजाते है और गोबर को पर्वत बनाकर पूजा करते है और पटाखे चलाते है। लोग इस दिन अपने रिश्तेदारों से मिलने जाते है। उत्तर भारत में इसे गोधन पूजा भी कहते हैं | 

5. पाँचवाँ दिन (भाई दूज) और चित्र गुप्त पूजा –

दीवाली का पांचवा दिन भी बहुत खास होता है | इस दिन भारत के कायस्थ समाज के लोग अपने कलम या पेन की पूजा करते हैं और दिन भर पेन या कलम  से कुछ लिखते नहीं है | वस्तुतः ये पूजा यम देव के सहायक चित्रगुप्त के लिए होती है | काफी महत्वपूर्ण दिन है ये भी |   ये दिन और त्यौहार भाइयों और बहनों का है। इस दिन यम देवता अपनी बहन यामी से मिलने गए औरवहाँ अपनी बहन द्वारा उनका आरती के साथ स्वागत हुआ और यम देवता ने अपनी बहन को उपहारदिया। इस तरह बहन अपने भाइयों की आरती करती है और फिर भाई अपनी बहन को कुछ  उपहार भेंट करता है।

इस तरह दीपावली का त्यौहार पाँचों दिन हर्षौल्लास के साथ मनाया जाता है।

दीपावली कहाँ – कहाँ मनाई जाती है –

दीपवाली पर्व रोशनी या उजाले का प्रतीक है | इस रौशनी के प्रतीक पर्व दीपावली के त्यौहार को भारत देश मे के अलावा विदेशों मे भी मनाया जाता है। दीपावली का पर्व विश्व भर मे हिन्दूजैन और सिख धर्मो के लोगों द्वारा मनाया  जाता है  भारतीय संस्कृति की समझ और भारतीय मूल के वैश्विक प्रवास के कारण दीपावली मनाने वाले देशों की संख्या धीरेधीरे बढ़ रही है। कई देशों मे इस दिन राष्ट्रिय अवकाश रहता है।

तो दोस्तों ये थी जानकारी दीपावली के बारे में कि दीपवाली क्यों मनाई जाती है – दीपावली क्यों मनाते हैं – दीपावली कब, क्यों, कैसे और कहाँ मनाई जाती है | अगर आपको ये पोस्ट पसंद आई होतो प्लीज इसे शेयर और लाइक ज़रूर करें |

 

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